जितेन्द्र कुमार सिन्हा, पटना (बिहटा), 05 सितम्बर ::
पटना जिला के बिहटा प्रखंड अंतर्गत देवकुली ग्राम स्थित पाटलिपुत्र प्राइवेट आईटीआई में शिक्षक दिवस के अवसर पर विशेष गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में गुरु-शिष्य परंपरा, शिक्षा के महत्व और विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य को लेकर विचार-विमर्श हुआ। संस्थान परिसर में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य राधेश्याम ने की। गोष्ठी में कुल 46 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान संस्थान परिसर में उत्सव जैसा माहौल रहा। विद्यार्थियों ने अपने शिक्षकों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त की। शिक्षकों ने भी विद्यार्थियों को जीवन में सफलता हासिल करने के लिए शिक्षा के साथ अनुशासन, मेहनत, ईमानदारी और निरंतर सीखने की आदत विकसित करने का संदेश दिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जेपी सेनानी वीरेंद्र प्रसाद सिंह ने शिक्षक दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह दिन देश की युवा पीढ़ी को अपने मार्गदर्शन में सुशिक्षित और योग्य बनाकर राष्ट्र का मान-सम्मान बढ़ाने वाले शिक्षकों को समर्पित है। शिक्षक केवल विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान नहीं देते, बल्कि उनके व्यक्तित्व और चरित्र का निर्माण भी करते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षक दिवस शिक्षकों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का पावन अवसर है। भारत में प्रत्येक वर्ष 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है। यह दिवस देश के पूर्व राष्ट्रपति और महान शिक्षाविद् डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है। डॉ. राधाकृष्णन ने शिक्षा और शिक्षक की भूमिका को समाज निर्माण का महत्वपूर्ण आधार माना था। वीरेंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसकी युवा पीढ़ी होती है और युवाओं को सही दिशा देने में शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। शिक्षक अपने ज्ञान, अनुभव और संस्कारों से विद्यार्थियों को जिम्मेदार नागरिक बनाने में अहम योगदान देते हैं।
इस अवसर पर अमहारा निवासी प्रोफेसर रामनाथ शर्मा, जीजे कॉलेज, रामबाग के हिंदी विभागाध्यक्ष, ने डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के व्यक्तित्व एवं कर्तृत्व पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने डॉ. राधाकृष्णन के शिक्षा, दर्शन और राष्ट्र सेवा से जुड़े योगदान को याद किया। साथ ही उनके व्यक्तित्व की विभिन्न विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए उनके मगही भाषा के प्रति लगाव की भी सराहना की। प्रोफेसर शर्मा ने कहा कि डॉ. राधाकृष्णन का जीवन विद्यार्थियों और शिक्षकों दोनों के लिए प्रेरणास्रोत है। उनका मानना था कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जित करना नहीं, बल्कि मनुष्य के व्यक्तित्व को बेहतर बनाना भी है।
कार्यक्रम में रंजन सर ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा केवल रोजगार पाने का माध्यम नहीं है, बल्कि बेहतर इंसान और जिम्मेदार नागरिक बनने का मार्ग भी है। शिक्षक विद्यार्थियों के भविष्य को दिशा देने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। उन्होंने छात्र-छात्राओं से अनुशासन, कठिन परिश्रम, ईमानदारी और निरंतर सीखने की भावना को अपने जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि तकनीकी शिक्षा के दौर में आईटीआई जैसे संस्थानों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गयी है। विद्यार्थियों को अपने हुनर को विकसित करने के साथ बदलती तकनीक के अनुरूप स्वयं को तैयार करना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान पूर्व शिक्षिका पूर्णिमा कुमारी एवं मुनचुन कुमारी के योगदान की भी सराहना की गयी। वक्ताओं ने कहा कि किसी भी शिक्षण संस्थान की सफलता केवल उसके वर्तमान शिक्षकों से नहीं, बल्कि उन सभी शिक्षकों के योगदान से बनती है, जिन्होंने कभी विद्यार्थियों को ज्ञान और मार्गदर्शन दिया हो। कार्यक्रम की सफलता में धीरज कुमार, प्रेमजीत कुमार, अंकित कुमार, काजल शाक्य सहित अन्य छात्र-छात्राओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता और उत्साह ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया।
गोष्ठी के दौरान शिक्षक और विद्यार्थियों के बीच आत्मीयता और सम्मान की भावना स्पष्ट रूप से देखने को मिली। विद्यार्थियों ने अपने शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। अंत में सभी ने एक-दूसरे को शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं दी। गुरु के सम्मान, शिक्षा के महत्व और विद्यार्थियों के उत्साह से भरा यह आयोजन पाटलिपुत्र प्राइवेट आईटीआई के लिए एक यादगार अवसर बन गया। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि मजबूत राष्ट्र की नींव केवल आधुनिक तकनीक से नहीं, बल्कि संस्कारवान, शिक्षित और जिम्मेदार युवा पीढ़ी से तैयार होती है और इस निर्माण में शिक्षक की भूमिका सर्वोपरि है।
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