*पटना के आचार्य शैलेश कुमार को ‘काशी ज्योतिष वाचस्पति’ अवार्ड एवं विगुणंदी नाड़ी में उत्कृष्ट कार्य के लिए मिला स्वर्ण पदक*

जितेन्द्र कुमार सिन्हा, पटना (वाराणसी), 03 सितम्बर ::

काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी में आयोजित दो दिवसीय काशी ज्योतिष महोत्सव ‘आयुर ज्योतिष 2026’ में पटना के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य आचार्य शैलेश कुमार को ज्योतिष के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य और महत्वपूर्ण योगदान के लिए प्रतिष्ठित ‘काशी ज्योतिष वाचस्पति अवार्ड’ से सम्मानित किया गया। राष्ट्रीय स्तर के इस आयोजन में देश के विभिन्न राज्यों से आए ज्योतिष एवं आयुर्वेद के सैकड़ों विद्वानों ने हिस्सा लिया। एक और दो सितंबर 2026 को काशी हिंदू विश्वविद्यालय स्थित चिकित्सा विज्ञान संस्थान के सभागार में आयोजित महोत्सव में भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न आयामों पर विद्वानों ने विचार-विमर्श किया। कार्यक्रम का आयोजन काशी हिंदू विश्वविद्यालय एवं काशी ज्योतिष संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में किया गया था।

समारोह में आचार्य शैलेश कुमार को यह सम्मान बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के आयुर्वेद संकाय के डीन प्रोफेसर के. एम. मूर्ति एवं ज्योतिषाचार्य डॉ. ए. एस. रावत ने प्रदान किया। ज्योतिष के क्षेत्र में उनके लंबे अध्ययन, शोध और निरंतर कार्य को देखते हुए उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान दिया गया। आचार्य शैलेश कुमार के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि राष्ट्रीय स्तर के मंच पर उन्हें उनके कार्यों के लिए पहचान मिली है। सम्मान मिलने के बाद पटना और बिहार के ज्योतिष जगत में खुशी का माहौल है।

महोत्सव के दौरान आचार्य शैलेश कुमार को विगुणंदी नाड़ी के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए अंगवस्त्र एवं स्वर्ण पदक प्रदान कर विशेष रूप से सम्मानित किया गया। नाड़ी ज्योतिष के क्षेत्र में उनके अध्ययन और कार्यों की विद्वानों ने सराहना की। आचार्य शैलेश कुमार लंबे समय से ज्योतिष और नाड़ी परंपरा के अध्ययन से जुड़े रहे हैं। इस सम्मान को उनके अध्ययन और शोध की राष्ट्रीय स्तर पर मिली महत्वपूर्ण स्वीकृति के रूप में देखा जा रहा है।

सम्मान प्राप्त करने के बाद अपने संबोधन में आचार्य शैलेश कुमार ने ज्योतिष और आयुर्वेद के समन्वय को अमृत के समान बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में ज्योतिष और आयुर्वेद दोनों का महत्वपूर्ण स्थान है। उन्होंने कहा कि दोनों शास्त्रों के समन्वित अध्ययन से मानव जीवन, स्वास्थ्य और जीवनशैली से जुड़े अनेक पहलुओं को भारतीय दृष्टिकोण से समझने में सहायता मिल सकती है। उनके अनुसार भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न विषयों का गंभीर और व्यवस्थित अध्ययन आज भी प्रासंगिक है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ज्योतिषाचार्य एवं धर्मगुरु डॉ. एच. एस. रावत ने ग्रहों के प्रभाव से संसार में होने वाली विभिन्न गतिविधियों पर विस्तार से विचार व्यक्त किया। उन्होंने ज्योतिष, आयुर्वेद और वेदों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण तथा उसके वैज्ञानिक अध्ययन की आवश्यकता पर जोर दिया। महोत्सव में देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे विद्वानों ने ज्योतिष एवं आयुर्वेद के विविध पहलुओं पर चर्चा की। इससे आयोजन भारतीय ज्ञान-विज्ञान की परंपरा को एक साझा मंच प्रदान करने वाला महत्वपूर्ण कार्यक्रम बन गया।

आचार्य शैलेश कुमार ने सम्मान को अपनी व्यक्तिगत उपलब्धि से अधिक ज्योतिष शास्त्र, नाड़ी परंपरा और भारतीय ज्ञान-विज्ञान के प्रति समर्पण का सम्मान बताया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि उन्हें आगे भी अध्ययन और शोध के लिए प्रेरित करेगी। उन्होंने भविष्य में ज्योतिष एवं भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न आयामों पर अध्ययन, शोध और जनजागरूकता से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

‘काशी ज्योतिष वाचस्पति’ सम्मान और स्वर्ण पदक प्राप्त करना आचार्य शैलेश कुमार के ज्योतिषीय जीवन की उल्लेखनीय उपलब्धि माना जा रहा है। काशी जैसे ऐतिहासिक और आध्यात्मिक केंद्र में राष्ट्रीय स्तर के आयोजन के दौरान सम्मानित होना उनके लिए विशेष गौरव का विषय रहा। इस उपलब्धि से न केवल पटना के ज्योतिष जगत को पहचान मिली है, बल्कि बिहार का नाम भी राष्ट्रीय ज्योतिष मंच पर गौरवान्वित हुआ है। आचार्य शैलेश कुमार का यह सम्मान भारतीय ज्योतिष एवं नाड़ी परंपरा के अध्ययन को आगे बढ़ाने की उनकी निरंतर यात्रा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में देखा जा रहा है।
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