बिहार में नीतीश कुमार की बोल बाला कायम है ?— डॉ प्रभात चंद्रा

जितेन्द्र कुमार सिन्हा, पटना, 01 मई ::

बिहार के मुख्यमंत्री एनडीए से अलग होने के बाद महागठबंधन की बात करते है और उसमें प्रायः कहते है कि उनकी लालसा नहीं है, वे पीएम के दावेदार खुद नहीं है। लेकिन खुलेआम जदयू के नेता और महागठबंधन के लोग उन्हें पीएम के दावेदार बता रहे है। इतना ही नहीं, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव जिस तरह से अन्य राज्यों के मुख्यमंत्री के साथ मिलकर वर्ष 2024 के आम चुनाव के लिए विपक्षी एकता को धार देने में लगे हैं। उससे तो लगता है कि कथनी और करनी में अंतर है।

कुछ भी हो, एक बात तो सही है कि जब जदयू के अध्यक्ष थे आर सी पी सिंह तो इसमें कोई दो मत नहीं था कि जदयू पार्टी की पकड़ जमीनी स्तर से लेकर केन्द्र सरकार तक बनी हुई थी। अगर आर सी पी सिंह अभी भी अध्यक्ष रहते और पार्टी से जुड़े होते, तो ऐसा नहीं होता, जो स्थिति नीतीश कुमार और उनकी पार्टी की है।

देखा जाय तो आर सी पी सिंह को पार्टी छोड़ते ही जदयू, एनडीए से अलग हो गया और राजद के गोद में बैठकर निष्क्रिय रूप से सरकार चला रही है। परिणाम यह है कि जनता का विश्वास दिन पर दिन जदयू से उठता जा रहा है। अब तो जदयू के लोग भी धीरे धीरे पार्टी से दूरियाँ बना रही है।

इसी का परिणाम है कि नीतीश कुमार स्वयं ही बिहार के भावी मुख्यमंत्री का नाम बताते है, पीएम उम्मीदवार न होने की बात कहकर भी विपक्षी पार्टियों के बीच में पैठ बना रहे हैं। बिहार में एक कहावत है “विनाश काले विपरीत बुद्धि”। नीतीश कुमार वर्ष 2024 में भाजपा को किसी भी तरह बिहार में कम से कम सिट मिले इसके लिए एन केन प्रक्रेन प्रक्रिया में लग गये हैं, यदि ऐसा नहीं होता तो क्या आवश्यकता पड़ गई थी की जेल में बंद नामी गिरामी अपराधियों को समय से पहले बाहर निकालने के लिए नियमावली में संशोधन करना पड़ा।

बिहार के मुख्यमंत्री विगत दिनों कांग्रेस के सोनिया गांधी से मिलने दिल्ली गये थे, लेकिन मुलाकात नहीं हुई और कांग्रेस का सकारात्मक रुख महागठबंधन की ओर दिखाई नहीं पड़ी वे हतास हो गये। अब वे अपना रूख बंगाल की ममता बनर्जी की ओर किया है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जब बंगाल के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मिले तो ममता बनर्जी ने कहा कि मैंने पहले भी कहा है कि मुझे कोई आपत्ति नहीं है। हमें भाजपा को जीरो पर आउट करना है। नीतीश जी सब से मिलकर बात कर रहे है। हम भी करेंगे, साथ मिलकर हमलोग चलेंगे। मेरा व्यक्तिगत अहम नहीं है। हम एकसाथ मिलकर काम करना चाहते है।

वहीं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का कहना है कि भारत का लोकतंत्र, संविधान संकट में है। इसे बचाने में एकजुट प्रयास जरुरी है। भाजपा की गलत नीतियों से गरीब, किसान, मजदूर, आज मुश्किल में है। वेरोजगारी महंगाई चरम पर है। हमलोग चाहते हैं कि भाजपा हटे, देश बचे। भाजपा को हटाने में हम साथ है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का कहना है कि हमलोग अधिक से अधिक पार्टियों को मिलाकर आगे बढ़ेंगे। मिलकर लड़ेंगे तो यह देश के लिए भी अच्छा होगा। सबलोग एक हो जाएँगे, उसके बाद नेता का चुनाव होगा। जो शासन चला रहे वह राज करने के चक्कर में लोगों को परेशान कर रहे है। बिहार यूपी में ज्यादा सीटें विपक्ष में ही रहेगी।

अगले आम चुनाव में अभी लगभग एक वर्ष बचा है और ऐसे में राजनीतिक गोलबंदी होना भी लाज़मी है। लेकिन जिस गंभीरता से बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार विकल्प तैयार करने में मसगूल हैं, ऐसे में उन्हें कई सवालों के जवाब भी तैयार रखने होंगे। अभी वह अपने को नेतृत्व के सवाल से बचते चल रहे है और कह रहे है कि इस रेस में नहीं है।
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