माँ महागौरी की उपासना से असंभव कार्य भी संभव होते हैं

जितेन्द्र कुमार सिन्हा, 24 अक्टूबर :: माँ दुर्गाजी की आठवीं शक्ति का नाम महागौरी है। नवरात्रि के आठवें दिन माँ महागौरी की उपासना का विधान है। इनकी शक्ति अमोघ और सद्यः फलदायिनी है। माँ महागौरी की उपासना से भक्तों के सभी पूर्व संचित पाप नष्ट हो जाते हैं। सभी प्रकार से पवित्र और अक्षय पुण्यों का अधिकारी हो जाता है। माँ महागौरी का वर्ण पूर्णतः गौर है। माँ महागौरी की चार भुजाएँ हैं। इनका वाहन वृषभ है। इनके ऊपर के दाहिने हाथ में अभय मुद्रा और नीचे वाले दाहिने हाथ…

राक्षस, भूत, प्रेत, पिसाच और नकारात्मक ऊर्जाओं का नाश करती है माँ कालरात्रि

जितेन्द्र कुमार सिन्हा, 22 अक्टूबर :: माँ दुर्गा की सातवीं शक्ति कालरात्रि हैं। नवरात्रि में सातवें दिन माँ कालरात्रि की उपासना का किया जाता है। इस दिन साधक का मन ‘सहस्रार’ चक्र में स्थित रहता है। माँ कालरात्रि को ही माँ काली, माँ महाकाली, माँ भद्रकाली, माँ भैरवी, माँ रुद्रानी, माँ चामुंडा, माँ चंडी और माँ दुर्गा के नाम से भी जाना जाता है।माँ कालरात्रि की पूजा से ब्रह्मांड की समस्त सिद्धियों का द्वार खुलने लगता है। मान्यता है कि माँ के इस रूप की पूजा से सभी राक्षस, भूत,…

दानवों और पापियों का नाश करती है माँ कात्यायनी

जितेन्द्र कुमार सिन्हा, 22 अक्टूबर :: नवरात्रि के छठे दिन माँ कात्यायनी की पूजा होती है। माँ कात्यायनी दानवों और पापियों का नाश करने वाली माँ हैं। माँ की उपासना संपूर्ण रोगों के नाश और भय मुक्त होने के लिए किया जाता है। महर्षि कात्यायन की कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर उनके यहां पुत्री के रूप में माँ कात्यायनी उत्पन्न हुई थी और महर्षि कात्यायन ने सर्वप्रथम इनकी पूजा की थी, इसीलिए माँ कात्यायनी के नाम से प्रसिद्ध हुई। माँ कात्यायनी को संस्कृत शब्दकोश में उमा, कात्यायनी, गौरी, काली, शाकुम्भरी,…

मोक्ष के द्वार खोलती है माँ स्कंदमाता

जितेन्द्र कुमार सिन्हा, 21 अक्टूबर :: नवरात्रि के पांचवे दिन माँ स्कंदमाता की पूजा होती है। मान्यता है कि माँ स्कंदमाता भक्तों की समस्त इच्छाओं की पूर्ति कर मोक्ष के द्वार खोलती है। माँ स्कंदमाता का स्वरुप मन को मोहने वाला है। स्कंद का अर्थ है कुमार कार्तिकेय अर्थात माता पार्वती और भगवान शिव के जेष्ठ पुत्र कार्तिकय। माँ आपनी चार भुजाओं में से दो हाथों में कमल का फूल, एक हाथ में बालरूप में बैठे स्कंद जी ( पुत्र कार्तिकेय), दूसरे हाथ में तीर है और कमल के आसन…

माँ कुष्मांडा हीं अष्टभुजा देवी है

जितेन्द्र कुमार सिन्हा, 20 अक्टूबर :: नवरात्र-पूजन के चौथे दिन माँ कुष्माण्डा के स्वरूप की उपासना की जाती है। माँ कुष्मांडा की आठ भुजाएँ हैं और माँ अष्टभुजा देवी के नाम से भी विख्यात हैं। माँ के हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, कमल-पुष्प, अमृतपूर्ण कलश, चक्र तथा गदा है। माँ के आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाली जपमाला है। माँ का वाहन सिंह है। माँ कुष्माण्डा के स्वरूप को ध्यान में रखकर पूजा-उपासना करने से साधक का ‘अनाहत’ चक्र अत्यंत पवित्र और अचंचल मन में स्थिरता…

धर्म रक्षक, असुर संहारक – शांतिदायक और कल्याणकारी है माँ चंद्रघंटा

जितेन्द्र कुमार सिन्हा, 19 अक्टूबर :: आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को (नवरात्रि के तीसरे दिन) माँ चंद्रघंटा की आराधना की जाती है। माँ दुर्गा के इस रूप की विशेष मान्यता है, क्योंकि माँ इस रुप में धर्म की रक्षा और असुरों का संहार करने के लिए अवतरित हुई थी। पौराणिक कथाओं के अनुसार माँ चंद्रघंटा के स्वरूप को परम शांतिदायक और कल्याणकारी माना गया है। माँ चंद्रघंटा के दस हाथ है, जो शस्त्र-अस्त्र से विभूषित हैं और माँ की सवारी सिंह है। मस्तिष्क पर घंटे के…

माँ ब्रह्मचारिणी की उपासना से तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार, संयम की वृद्धि होती है

जितेन्द्र कुमार सिन्हा, 18 अक्टूबर :: माँ दुर्गा के द्वितीय स्वरूप ब्रह्मचारिणी का आज उपासना होती है। ब्रह्मचारिणी की उपासना से तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार, संयम की वृद्धि होती है। माँ ब्रह्मचारिणी का तात्पर्य तपश्चारिणी है। माँ ब्रह्मचारिणी देवर्षि नारद जी के कहने पर भगवान शंकर की कठोर तपस्या की थी, जिससे प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने इन्हें मनोवांछित वरदान दिया था, जिसके फलस्वरूप भगवान भोले नाथ की वामिनी अर्थात पत्नी बनी। इस कठिन तपस्या के कारण इन्हें तपश्चारिणी अर्थात्‌ ब्रह्मचारिणी नाम से अभिहित किया गया। इसलिए माँ के इस…

नवरात्रि में कलश स्थापित की मिट्टी में जौ क्यू बोए जाते हैं

जितेन्द्र कुमार सिन्हा, 14 अक्टूबर :: नवरात्रि में कलश स्थापना प्रतिपदा के दिन किया जाता है और जिस मिट्टी पर कलश स्थपित होता है उस मिट्टी में जौ बोए जाते हैं और नवरात्रि के समापन पर इन्हें जल में प्रवाहित कर दिया जाता है। मान्यता है कि कलश स्थापित जौ जितना अधिक बढ़ता है उतना अधिक मां भगवती की कृपा मिलती है और सुखसमृद्धि आती है। यह भी कहा जाता है कि सृष्टि की शुरुआत में जौ ही सबसे पहली फसल थी और जौ के उगने या न उगने से…

त्योहारों के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर की गाइडलाइन का पालन करना होगा

जितेन्द्र कुमार सिन्हा, पटना, 08 अक्टूबर :: सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर में कहा है कि कंटेनमेंट जोन में किसी भी तरह की धार्मिक पूजा-पाठ, कार्यक्रम, मेले, सांस्कृतिक कार्यक्रम, जुलूस और लोगों को एकत्रित होने वाले कार्यक्रम की अनुमति नहीं होगी। धार्मिक स्थानों और नवरात्रि के पंडालों में मूर्तियों को छूने की अनुमति नहीं होगी। सूत्रों के अनुसार, सरकार के दिशा- निर्देशों में प्रशासन को त्योहारों के मौसम में साफ-सफाई, थर्मल स्क्रीनिंग, सेनेटाइजेशन की व्यापक व्यवस्था रखनी होगी। नई गाइडलाइन के अनुसार,…

इस वर्ष 17 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि शुरु होगी

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जितेन्द्र कुमार सिन्हा, पटना, 18 सितम्बर :: सूत्रों ने जानकारी दी कि मलमास लग जाने के कारण इस वर्ष शारदीय नवरात्रि 17 अक्टूबर से शुरू हो कर 25 अक्टूबर तक चलेगा। इस साल दो माह अधिक मलमास/खरमास लगने के कारण (लीप इयर होने के कारण) ऐसा हो रहा है। लीप ईयर और मलमास एक साथ 165 वर्ष बाद पड़ा है। प्रत्येक वर्ष शारदीय नवरात्रि का पर्व पितृपक्ष (श्राद्ध) के बाद ही प्रारंभ हो जाता था, लेकिन इस बार पितृपक्ष (श्राद्ध) के तत्काल बाद ही मलमास/खरमास लगने के कारण शारदीय नवरात्रि…