युवा प्रतिभाओं को सम्मान और दिशा देने की पहल – “GKC Gen-G कायस्थ उत्कृष्टता पुरस्कार”

जितेन्द्र कुमार सिन्हा, पटना, 30 जनवरी ::

कायस्थ समाज की युवा पीढ़ी में छिपी प्रतिभाओं को पहचानने और उन्हें वैश्विक मंच प्रदान करने की दिशा में ग्लोबल कायस्थ कॉन्फ्रेंस (GKC) कर्नाटक ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। “GKC Gen-G (जनरेशन ग्लोबल) कायस्थ उत्कृष्टता पुरस्कार” की घोषणा के साथ ही यह स्पष्ट हो गया है कि संगठन आने वाली पीढ़ी को नेतृत्व, संस्कार और नवाचार से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है।

GKC कर्नाटक द्वारा घोषित यह प्रतिष्ठित पुरस्कार 1 फरवरी 2026 को GKC के स्थापना दिवस के अवसर पर कोरमंगला क्लब, बेंगलुरु में प्रदान किया जाएगा। यह आयोजन न केवल सम्मान समारोह होगा, बल्कि युवा कायस्थ प्रतिभाओं के लिए प्रेरणा और उत्साह का मंच भी बनेगा। कार्यक्रम को भव्य और स्मरणीय बनाने के लिए GKC कर्नाटक की पूरी टीम सक्रिय रूप से कार्य कर रही है।

GKC कर्नाटक के प्रदेश अध्यक्ष श्री नितेश शरण ने बताया है कि इस पुरस्कार की परिकल्पना का मुख्य उद्देश्य 12 से 22 वर्ष आयु वर्ग के उन युवाओं को सम्मानित करना है, जिन्होंने शिक्षा, खेल, संगीत, कला एवं संस्कृति, विज्ञान एवं नवाचार, उद्यमिता तथा अन्य विशिष्ट क्षेत्रों में असाधारण उपलब्धियाँ प्राप्त की हैं। यह पहल युवाओं को समाज की विरासत, मूल्यों और दूरदर्शी सोच से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनेगी।

इस पहल को GKC के ग्लोबल प्रेसिडेंट राजीव रंजन प्रसाद एवं मैनेजिंग ट्रस्टी रागिनी रंजन का पूर्ण समर्थन प्राप्त हुआ है। उन्होंने इसे भविष्य के कायस्थ नेतृत्व को सशक्त करने वाला एक दूरदर्शी प्रयास बताया है। साथ ही ग्लोबल उपाध्यक्ष दीपक कुमार अभिषेक, राष्ट्रीय महासचिव नवीन कुमार, राष्ट्रीय सदस्यता अभियान संयोजक श्री निलेश रंजन, श्री पवन सक्सेना (कला एवं संस्कृति) सहित अनेक राष्ट्रीय पदाधिकारियों ने इस पहल की मुक्त कंठ से सराहना की है।

GKC Gen-G कायस्थ उत्कृष्टता पुरस्कार के लिए नामांकन पूरे भारत ही नहीं, बल्कि विश्व भर से आमंत्रित किए गए हैं। यह तथ्य स्वयं में इस पहल की वैश्विक सोच और व्यापक प्रभाव को दर्शाता है। GKC कर्नाटक समिति के सदस्य इस आयोजन को सफल बनाने हेतु टीमवर्क, समर्पण और सामुदायिक भावना के साथ जुटे हुए हैं।

“GKC Gen-G कायस्थ उत्कृष्टता पुरस्कार” केवल एक सम्मान नहीं है, बल्कि युवा कायस्थ प्रतिभाओं के आत्मविश्वास, पहचान और भविष्य निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह पहल निस्संदेह आने वाले वर्षों में वैश्विक कायस्थ समुदाय को एकजुट करने और नई पीढ़ी को सशक्त नेतृत्व के लिए तैयार करने में अहम भूमिका निभाएगी।

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